अपराधक्राइमटॉप न्यूज़देशभोपालमध्य प्रदेशराज्यलोकल न्यूज़स्कैम

रसूखदारों और भ्रष्ट तंत्र की मिलीभगत का पर्याय सिद्धांता हॉस्पिटल 

भोपाल : 5 जुलाई 2026

 *भूमिका:* सिद्धांता अस्पताल कहने को अस्पताल है जिसमें मरीजों का इलाज होता है उन्हें गंभीर बीमारियों से निजात मिलती है पर अस्पताल मरीजों से इलाज के नाम पर लाखों रुपए वसूलता है। सिद्धांता की नींव रेड क्रॉस सोसाइटी के सहयोगी के रूप में रखी गई थी, रेड क्रॉस सोसायटी द्वारा इसे लोक स्वास्थ्य और समाज कल्याण के लिए ही दिया गया था पर इसके उलट इसके अनुबंध से लेकर संचालन तक सब कुछ सवालों के घेरे में है। रेड क्रॉस सोसाइटी के कैंपस में चल रहा ये अस्पताल भारी अनियमितताएं, भ्रष्टाचार, धांधली और अवैध अतिक्रमण का पर्याय बन चुका है। अनुबंध से लेकर संचालन तक कदम कदम पर रसूखदारों द्वारा कैसे रेड क्रॉस की जमीन और पैसे का भ्रष्टाचार किया गया है कि लगता है मानो नियम एवं कानून केवल आम लोगों भर तक ही सीमित है। रामचरित मानस की चौपाई ” समरथ को नहीं दोष गुसाईं” को चरितार्थ होते हुए देखा जा सकता है।

 *विस्तार:* आइए जानते हैं कैसे सिलसिलेवार कदम कदम पर नियमों और शर्तों को अपने हिसाब से तोड़ा और मरोड़ा गया!!!

*मनमाना अनुबंध और अवैध नियुक्ति:* पहले समझिए अनुबंध कैसे अपने तरीके से अपने नियम एवं शर्तों के साथ अनुबंधित किया गया। इसकी शुरुआत जून 2014 में हुई पहले जनरल सेक्रेटरी की नियुक्ति मनमाने तरीके से और फिर करोड़ों अरबों की जमीन पर बने बनाए भवन को कौड़ियों के दाम में अपने नियम और शर्तों से अधिग्रहीत किया गया। आज तक आपने कहीं भी ये नहीं सुना होगा कि किराएदार मकान मालिक को अपने नियम एवं कानून से बांधे रख सकता है पर सिद्धांता और रेड क्रॉस का अनुबंध ये दिखाता है कि अगर आप रसूखदार हो और कुछ रसूखदार आपके साथ हैं तो आप किराएदार होकर भी मकान मालिक को अपने नियम एवं शर्तों से दबा सकते हो और अगर वो रेड क्रॉस जैसी सोसाइटी का मामला हो तो आप कैसे चंद पैसों के लिए बने बनाए भवन को अधिग्रहीत करके उसका बंदर बांट कर घोर भ्रष्टाचार कर सकते हो। यही हुआ है सिद्धांता और रेडक्रॉस के अनुबंध से, इसमें न केवल सिद्धांता अस्पताल के मालिक सुबोध वार्ष्णेय अपितु बड़े-बड़े रसूखदार नेता भी शामिल है। सिद्धांता को रेड क्रॉस सोसाइटी की जमीन दिलवाने के नाम पर न केवल अनियमितताएं का मामला है बल्कि भ्रष्टाचार की भी बू आती है। नियम एवं शर्तें पूरी तरीके से सिद्धांता को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गईं स्पष्ट रूप से कहा जाए तो सुबोध वार्ष्णेय को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गईं।

पहले 5 जून 2014 को राजीव नयन तिवारी को बिना किसी बोर्ड मीटिंग और अनुमोदन के सीधे जनरल सेक्रेटरी के पद पर नियुक्त कर दिया गया (आदेश क्रमांक IRCS/2014/3681 दिनांक 5 जून 2014) फिर राजीव नयन तिवारी अबाधित नियुक्त रखने के लिए महज 15 दिन में इसी आदेश को संशोधित कर उन्हें हटाने वाला नियम आदेश से हटा दिया गया (आदेश क्रमांक IRCS/2014/3940 दिनांक 20 जून 2014)। ये सिद्धांता को स्थापित करने की पहली कड़ी थी। फिर शुरू हुआ रेड क्रॉस के बने बनाए भवन को हथियाने का षडयंत्र, तत्कालीन चेयरमैन रेडक्रास सोसाइटी मुकेश नायक (जो कि वर्तमान में राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के मीडिया प्रभारी भी है और पूर्व कैबिनेट मंत्री कांग्रेस सरकार भी हैं), जनरल सेक्रेटरी राजीव नयन तिवारी और सुबोध वार्ष्णेय ने रेड क्रॉस की जगह पर संचालित कामकाजी महिला हॉस्टल को सिद्धांता को अधिग्रहीत कराने के लिए सारे नियम एवं शर्तों को एक तरफा सिद्धांता के पक्ष में रखकर जून 2014 में एक अनुबंध तैयार किया फिर इसे बाद में रजिस्टर्ड करा दिया गया ताकि बाद में आने वाले कोई भी चेयरमैन या अधिकारी चाहकर भी सिद्धांता की वहां से हटा ना पाए।

 *अनुबंध की मनमानी शर्तें भी अपर्याप्त :*

पहले सिद्धांता को केवल 11 विधाओं के साथ ही संचालित करने की अनुमति मिली थी पर सिद्धांता ने इस अनुमति को भी ताक में रखकर 17 से अधिक विधाओं का संचालन प्रारंभ कर दिया और अब इन्हीं सब विधाओं से करोड़ों अरबों रुपए अनवरत कमाए जा रहे हैं। इसके अलावा जो अनुबंध है वो मात्र 24000 वर्ग फीट का ही था पर सुबोध वार्ष्णेय का मन 24000 वर्ग फीट से नहीं भरा तो उन्होंने अनुबंध की शर्त को दरकिनार करते हुए 27500 वर्ग फीट पर अतिक्रमण करके उस पर भी अपना कब्जा जमा लिया। अनुबंध अपनी शर्तों पर फिर भी लालच जाता नहीं।

*भ्रष्ट तंत्र और सांठगांठ:*

अब समझिये कि भ्रष्ट तंत्र ने सुबोध वार्ष्णेय कि कैसे सहायता की। सिद्धांता हॉस्पिटल का भवन भी भवन निर्माण की शर्तों को दरकिनार करके बनाया गया। जो भवन बनाया गया है वो अनुमति से कहीं ज्यादा पर है, टाउन प्लानर की आपत्ति के बावजूद सिद्धांता भ्रष्ट तंत्र की मेहरबानी से अनवरत संचालयीन है और सुबोध वार्ष्णेय सिद्धांता का संचालन कर रोगियों का महंगा उपचार कर दिन ब दिन अरबपति बनते जा रहे हैं। भ्रष्ट तंत्र में केवल भवन निर्माण विभाग ही नहीं स्वास्थ्य विभाग भी शामिल है 2022 में तत्कालीन सीएमएचओ प्रभाकर तिवारी ने अपने जांच प्रतिवेदन में सिद्धांता को क्लीन चिट देकर उसे सभी आरोपों से बरी कर दिया। कई बार शिकायतों के बाद भी स्वास्थ्य विभाग सोता रहा और आज भी गहरी नींद में ही है।

 *शिकायतें और रसूखदारों का संरक्षण:*

ऐसा नहीं है कि कभी इनकी शिकायत नहीं हुई, शिकायत तो हुईं हैं पर “समरथ को नहीं दोष गुसाईं” को चरितार्थ करते हुए भ्रष्ट सिस्टम ने आंख बंद करके उन पर कोई ध्यान ही नहीं दिया। अगस्त 2017 में रिटायर्ड मेजर जनरल एस आर सिन्हा ने तत्कालीन राज्यपाल (मप्र) को एक पत्र लिखकर शिकायत की थी पर वो आज भी ठंडे बस्ते में है। फिर सीएमएचओ भोपाल को 2022 में एक पत्र लिखकर अनियमितताओं, कुप्रबंधन, लचर और मेंहंगी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर शिकायत की गई पर तत्कालीन सीएमएचओ भोपाल प्रभाकर तिवारी ने न तो संज्ञान लिया बल्कि इसके विपरीत सिद्धांता को अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर अनवरत संचालन की छूट दे दी। इसके पहले वर्ष 2015 में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) में FIR कराई गई पर वो भी आज तक ठंडे बस्ते में है।वर्तमान चेयरमैन रेडक्रॉस और सेवानिवृत्त आईएएस श्याम सिंह कुमरे जी अब इस बात का संज्ञान ले रहे हैं और कोशिश कर रहे हैं कि भ्रष्टाचार और अनियमितता की भेंट चढ़े इस बंदर बांट को रोक जाए पर देखते हैं आगे क्या होता है

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!