(लीड) समाज के रक्त में लोकतंत्र है, उसे दबाने की कोशिश करने वाला मिट्टी में मिल जाएगाः भैयाजी जोशी

भोपाल: 20 फरवरी 2026
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश जोशी उपाख्य भैयाजी जोशी ने कहा कि आपातकाल की घटना सिखाती है कि कोई तानाशाह बनने की कोशिश करेगा तो ये समाज, ये देश सहन नहीं करेगा। समाज के रक्त में लोकतंत्र है, जनतंत्र है, उसे दबाने को कोशिश कने वाला मिट्टी में मिल जाएगा।
भैयाजी जोशी गुरुवार को आपातकाल के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में ‘आपातकाल और युवा‘ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय विमर्श को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन हिन्दुस्थान समाचार बहुभाषी संवाद समिति और सैम ग्लोबल यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल, पूर्व राज्यसभा सदस्य कैलाश सोनी मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी के अध्यक्ष अरविंद भालचंद्र मार्डीकर ने की।
भैयाजी जोशी ने कार्यक्रम के आयोजन के लिए हिन्दुस्थान समाचार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यहां शायद ही कुछ लोग होंगे, जिन्होंने उस आपातकाल का अनुभव किया है और बहुत से लोग हैं, जिन्होंने उस घटना के बारे में सुना है। जिन्होंने अनुभव किया, उनके लिए स्मृति से कई बातों को हटाना असंभव है। उन्होंने कहा कि देश का दुर्भाग्यपूर्ण काला इतिहास 26 जून 1975 को शुरू हुआ और मार्च 1977 को वह कालखंड समाप्त हुआ। क्या हुआ था उस समय, सत्ता में बैठी हुई व्यक्ति निरंकुश सत्ता चलाना चाहती थीं। हम कुछ भी करेंगे, उसके विरोध में कोई स्वर उठा न सके, हमें कोई रोक न सके, इस प्रकार का व्यक्ति केन्द्रित विचार करते हुए इस कानून का सहारा लेते हुए 25 जून की मध्य रात्रि को ये आपातकाल घोषित किया गया।
उन्होंने कहा कि सब प्रकार के जनतंत्र द्वारा प्राप्त अधिकारों का हनन करते हुए केवल और केवल एक व्यक्तिगत इच्छा की पूर्ति के लिए उसने यह सब कानून बनाया। उस समय के प्रधानमंत्री के निर्वाचन को इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी गई, उनके खिलाफ चुनाव लड़ने वाले राजनारायण थे। उन्होंने उस निर्णय को चुनौती दी। न्यायालय में मामला चला, फैसला आ गया कि निर्वाचन अनुचित है, लेकिन इंदिरा गांधी ने हटने का मार्ग चयन नहीं किया, सारे देश को जेल बनाने का निर्णय लिया। अपनी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को दांव पर लगाकर इस देश के लोकतंत्र को समाप्त करने का एक वेदनादायक कदम उठाया। जो कानून लाया गया, उसे मीसा के नाम से जाना जाता है।
भैयाजी जोशी ने कहा कि इस एक कानून के आधार पर अपने विरोधियों को सब प्रकार से प्रतिबंधित किया गया, जेल में डाला गया। इस कानून का भयानक सूत्र था कि इसके खिलाफ न्यायालय में भी नहीं जा सकते, इसके खिलाफ कुछ लिख नहीं सकते, जनसभाएं नहीं ले सकते, कोई आंदोलन खड़ा नहीं कर सकते। जो करेगा उसे देशद्रोही-समाजद्रोही माना जाएगा और उसे जेल के अंदर जाना पड़ेगा। इसके बाद 1977 में निर्वाचन घोषित कर दिया गया। चुनाव में 20-25 दिन बचे हैं। उन्हें लगा कि अलग-अलग दलों के जो नेता जेलों में हैं, उनकी आवाज दबी हुई है, वे क्या कर लेंगे। आश्चर्य की बात है कि सोया हुआ समाज नहीं था, जागृत समाज था। इसलिए जैसे ही अवसर प्राप्त हुआ समाज की शक्ति खुलकर सामने आ गई थी। उस डर के वातावरण में भी नेता बिना किसी भय के साहस के साथ जनता के बीच गए। नियोजित समय पर निर्वाचन हुआ और जनता ने उन्हें दिखा दिया कि तुम्हारा स्थान क्या है। इस देश का युवा वर्ग अपनी सूझ-बूझ के साथ खड़ा हुआ और काले कानून से मुक्त होते हुए मूल परम्पराओं के साथ चलना प्रारंभ किया। ये घटना दो बातें सिखाती हैं। एक बात है कि कोई तानाशाह बनने की कोशिश करेगा ये भारत यहां का समाज कभी भी इसका सहन करने वाला नहीं। दूसरी बात आती है समाज के रक्त में लोकतंत्र-जनतंत्र है, ये भारत की हजारों वर्षों की परम्परा है, यहां सभी को मत रखने का अधिकार है। इस अधिकार को जो भी समाप्त करने की कोशिश करेगा, वह मिट्टी में मिलेगा, यही उसकी नियति है।
आपातकाल में किस तरह लोकतंत्र का अपहरण हुआः उप मुख्यमंत्री शुक्ल
कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि आपातकाल में जिस तरह से लोकतंत्र का अपहरण हुआ, इस विषय में जानने की सबसे ज्यादा जरूरत युवाओं को है, क्योंकि लोकतंत्र लंबे समय के संघर्ष के बाद स्थापित हुआ और देश की बेहतरी के लिए हुआ था, देश को फिर से विश्व गुरु के स्थान पर पहुंचाकर दुनिया का नेतृत्व करने के लिए हुआ था, जिससे दुनिया में शांति की स्थापना हो सके और हम लोकतंत्र को अमर बना सकें।
उन्होंने कहा कि सत्ता के सदुपयोग और दुरुपयोग में क्या अंतर होता है और जब सत्ता का दुरुपयोग होता है तो स्थिति विकट हो सकती है, ये आपातकाल में हम लोगों ने देखा। जनता के आशीर्वाद से मिली हुई सत्ता इस बात के लिए नहीं है कि जो कुर्सी हमारे हाथ से जाने का खतरा आ जाए और वह भी उच्च न्यायालय के आदेश पर, तो हम ऐसी स्थिति पैदा कर दें कि लाखों लोगों को जेल के अंदर ठूस दिया जाए, प्रताड़ना दी जाए, प्रेस की स्वतंत्रता को समाप्त कर दिया जाए इससे भयावह स्थिति नहीं हो सकती। उन लोगों के लिए इससे बड़ी चिंता का विषय नहीं हो सकता कि लोगों ने लोकतंत्र की स्थापना एक बड़े मिशन की पूरा करने के लिए गई थी।
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने जब जनसंघ की पहली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की पहली बैठक की तो उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया था कि समाज के अंतिम छोर पर बैठा व्यक्ति जिस दिन मुस्कराकर कह दे कि अब किसी प्रकार की समस्या हमारे सामने नहीं। हमारी सारी समस्याओं का समाधान हो गया, उस दिन मान जाना कि आपका राजनीति में आने का उद्देश्य पूरा हो गया। देश का सौभाग्य है कि भारत आर्थिक महाशक्ति बन रहा है। चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हमारा देश बन चुका है। ये युवाओं के लिए संतोष की बात है, क्योंकि आगे उनका लम्बा भविष्य है, लेकिन आर्थिक महाशक्ति बनने के साथ-साथ हमारी संस्कृति, हमारी विरासत और इसीलिए प्रधानमंत्री जी ने कहा है कि विरासत से विकास। हम अपना एक पैर जमीन में जमाकर और लम्बी छलांग लगाने की दिशा में देश को आगे ले जाने का काम होना चाहिए, जिससे विकास हमारे लिए अभिशाप न बने, बल्कि वरदान बने।
इमरजेंसी की कल्पना करते ही शरीर में सिहरन पैदा हो जाती है : कैलाश सोनी
पूर्व राज्यसभा सदस्य कैलाश सोनी ने 25 जून 1975 की रात को भारतीय लोकतंत्र का “काला अध्याय” बताया। उन्होंने कहा कि उस समय संविधान की आत्मा पर प्रहार किया गया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचल दिया गया। आपातकाल की कल्पना करते ही आज भी शरीर में सिहरन पैदा हो जाती है, क्योंकि मैंने उस दौर को स्वयं भोगा है। उन्होंने नई पीढ़ी को लोकतंत्र के संघर्षमय इतिहास से अवगत कराने की आवश्यकता पर बल दिया।
कैलाश सोनी ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र मात्र चुनावी प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नागरिक स्वतंत्रता, संवैधानिक मूल्यों और जनसहभागिता से जीवित रहता है। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी जिस स्वतंत्र वातावरण में अपने विचार व्यक्त कर पा रही है, वह अनेक लोकतंत्र सेनानियों के त्याग और संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए कहा कि हिन्दुस्तान की दूसरी आजादी के लिए अनेक लोगों ने जेलों में यातनाएं सही। यह संघर्ष केवल राजनीतिक परिवर्तन का नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा को बचाने का अभियान था। उन्होंने कहा कि इतिहास की भूलों से सीख लेना आवश्यक है। यदि युवा वर्ग संविधान के मूल्यों के प्रति सजग रहेगा, तो भविष्य में कोई भी सत्ता नागरिक अधिकारों का हनन नहीं कर सकेगी। उन्होंने युवाओं को लोकतंत्र का प्रहरी बनने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में हिन्दुस्थान समाचार के अध्यक्ष अरविंद भालचंद्र मार्डीकर ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन सैम ग्रुप के चेयरमैन डॉ. हरप्रीत सलूजा ने दिया, आभार प्रदर्शन हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी के क्षेत्रीय संपादक एवं मप्र ब्यूरो प्रमुख डॉ. मयंक चतुर्वेदी ने किया और कार्यक्रम का संचालन डॉ. निवेदिता शर्मा ने किया। इस दौरान सैम ग्लोबल यूनिवर्सिटी की कुलाधिपति प्रीति सलूजा, विद्यार्थियों, प्राध्यापकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं जनप्रतिनिधियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।




